Thursday, January 19, 2017

तो क्या करोगे

जब शहर में तुम्हारे, फूल खिलेंगे।
और भँवरे सारे महकेंगे-
खुशबु उनही की लिये।
और दूर किसी गाँव से ठंडी हवा,
गर्माहट को दिल की बुझाएगी।
फिर चाँद झील में झांकेगा,
और चेहरा खुद का वो ताकेगा।
और तुम होँगे बैठे वहाँ,
बस पैर डुबोये पानी में।
तो क्या करोगे?

जब फूल कोई एक भँवरे को,
नशे से पूरा भर देगा।
गुलामी वो खुशबुओं की,
फिर करता ही जायेगा।
जीता हुआ भी मरता सा जायेगा।
और पुरे शहर की गर्माहट,
दुल में तुम्हारे जब होगी।
फिर चाँद सी तुम-
चांदनी को झील में देखोगी।
और में बैठा होऊंगा,
पैर डुबोये पानी में।
तो क्या करोगे!

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I am.........

I am PGP student of IIM Indore(batch 2011-13) and I want to be an eminent innovative writer(of-course I want to build a successful career in management too :)) and my
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packed with poems and things that I like from the very deep of my heart. Hope you will like it.After writing on my other blog for about10 months, here I am with this new one. I would like to be your friend as despite of having a crowd of mates I am still striving to get more pals who will go with me even when I'll be an old machine.
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